अमृतारिष्ट की जानकारी लाभ और उपयोग विधि amritarisht ayurvedic

अमृतारिष्ट की जानकारी लाभ और उपयोग विधि – amritarisht ayurvedic medicine  amritarisht syurp in hindi अमृतारिष्ट का उपयोग किन रोगों में किया जाता है, अमृतारिष्ट आयुर्वेदिक सिरप का प्रयोग कब और कैसे करना चाहिए  ,इसके फायदे और नुक्सान क्या हैं . इस ओषधि में कौन कौन से द्रव्य डाले गए है ,अमृतारिष्ट का उपयोग ज्यादातर पुराने बुखार में किया जाता , टाइफाइड और मलेरिआ के बुखार में भी लाभप्रद है

एक ayurvedic ओषधि बनाने में कई जड़ी बूटिओं का प्रयोग किया जाता है ,अमृतारिष्ट में मुख्यता इन जड़ी  का प्रयोग किया जाता है .

गिलोय 4800 ग्राम
बेल की छाल
अरणी की छाल
अरलू की छाल
गंभरी की छाल
शालपर्णी की छाल
पृश्निपर्णी की छाल
छोटी कटेली
बड़ी कटेली
गोखरू
पाडल की छाल   (  2 se 11 tk 4800 gram )
इनके इलावा ये द्रव्य भी मिलाये जाते है

गुड़                            4800 gram
सफ़ेद जीरा                 64  तोला
पिपपड़ा                      8  तोला
सतपर्ण की छाल          4 तोला
सोंठ                           4 तोला
मिर्च                            “
पीपल                         4 तोला
नागरमोथा                      “
नागकेसर                       “
कुटकी                            “
अतीस                            “
इंद्र जो                            “
धायके फूल                32  तोला

अमृतारिष्ट लाभ और उपयोग :-
पुराण बुखार :-

मनुष्य को fever किसी भी कारन से हो इसका प्रयोग लाभदायक है , पुराने बुखार में ये रामबाण  ओषधि है. typhoid  , विषम ज्वर पीलिया और लीवर सम्बंधित बुखार , RBC की कमी जिसमे शरीर का रंग पीला दिखने लगता है ,बार बार होने बाला बुखार और बुखार के बाद आयी कमजोरी को ठीक करने के लिए अमृतारिष्ट का उपयोग किया जाता है .

मूत्र दोष  :-

मूत्राशय की weaknes के कारण यदि बार बार पेशाब आने की शिकायत है तो ये उसको भी ठीक कर देता है,इसके इलावा ये रक्तशोधन का काम भी करता है ,सुजाक और उपदंश के कारण अगर खून खराब हो गया हो संधिबात के लक्षण दिखे तो अमृतारिष्ट का उपयोग करना चाहिए .

पाचन क्रिया को सुधारता है :-

अधिक दिनों तक फीवर रहने से मंदाग्नि हो गयी हो , भूख कम लगती हो और जो खाते है वो ठीक से पचता नहीं ,या ज्यादा एंटीबायोटिक खाने से जिगर में गर्मी हो जाती है ,मदाग्नि से पेट की वायु का संचार ठीक से नहीं होता अफारा और पेट की दर्द जैसे उपद्रव होने लगते है पतले दस्त इन सब रोगों से छुटकारा पाने के लिए अमृतारिष्ट उत्तम आयुर्वेदिक oshadhi  है इसका प्रभाव सबसे पहले अमाशय पर पड़ता है ये पाचक पित्त को उत्तेजित कर पाचन क्रिया को ठीक करता है तथा भूख में वृद्धि करता है.

रक्त में लाल कणो की कमी  ( lever tonic ):-

पुराने ज्वर के कारण शरीर में रस रक्त आदि धातुएं ठीक मात्रा में नहीं बनती , अतएव शरीर में लाल रक्त कणो की कमी होने लगती है ,शरीर और चेहरे का रंग पीला दिखने लगता है ,अमृतारिष्ट रंजक पित को जागृत कर के शरीर में खून की वृद्धि करता है जिस से चेहरे पर कान्ति आ जाती है ,और साथ में लीवर और प्लीहा की वृद्धि रोक कर उनको healthy बना देता है.

प्रसूत ज्वर में लाभकारी :-

पित्तप्रधान सूतिका ज्वर में यदि हाथों पैरों में जलन , पेट में जलन दाह , प्यास का अधिक लगना , चककर आने लगे बुखार अधिक बड़ा हुआ हो तो अमृतारिष्ट का सेवन करना चाहिए ,

ज्वर के बाद की कमजोरी और थकावट :-

ज्वर का अधिक दिनों तक बने रहने के कारण लीवर और प्लीहा में वृद्धि हो जाती है ,शरीर में दुर्बलता और कमजोरी के लक्षण दिखने लगते है जाड़ा देकर आने वाले बुखार में इसके साथ सुदर्शन चूर्ण का प्रयोग करने से रोगी जल्दी स्वस्थ हो जाता है.

सेवन विधि :-

1 तोला से 2 तोला तक बराबर पानी मिलाकर ,भोजन के एक घंटा बाद दिन में दो बार सेवन करें ,बच्चों को आधी खुराक देना चाहिए.

amritarisht  निर्माता :-

अमृतारिष्ट को कई कोम्पनिओ द्वारा त्यारा किया जाता है , पतंजलि , बैध्यनाथ , धन्वंतरि , डाबर ,आप किसी भी निर्माता द्वारा बानी अमृतारिष्ट सेवन कर सकते है

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amritarisht  के सेवन से हर प्रकार के बुखार के बाद की weakness को ठीक करने की अद्भुत शक्ति है ,लीवर वृद्धि पलीहा वृद्धि . खून की कमी पाचन शक्ति की कमजोरी , चेहरा पीला पड़ जाना ,पुराना बुखार आदि रोगो के लिए सबसे best अरिष्ट है , इसका सेवन आयुर्वेदाचार्य की देख रेख में करना चाहिए .