vastu tips for money in hindi वास्तुशात्र के ये नियम आपको बनाते है धनवान

vastu shastr ke  niyam dhan vridhi ke liye   वास्तुशात्र के ये नियम आपको बनाते है धनवान
वास्तु शास्त्र के नियम जो आपको successful बना सकते  अगर आपको विश्वास नहीं है तो आपकी मर्ज़ी लेकिन ये सत्य है ,एक आदर्श घर कैसा होता है आपके लिए ये जानना जरुरी है . यदि आपको घर में सुकून की नींद, अच्छा सेहतमंद भोजन और भरपूर प्यार-अपनापन नहीं मिल रहा है तो घर में वास्तुदोष है घर है तो परिवार और संसार है। घर नहीं है तो भीड़ के बीच सड़क पर हैं। खुद का घर होना जरूरी है। जीवन का पहला लक्ष्य मजबूत और वास्तुदोष से मुक्त घर होना चाहिए। यदि यह है तो बाकी समस्याएं गौण हो जाती हैं.

vastu tips for money in hindi
vastu for money how to keep money

vastu tips for money in hindi

नियम नंबर 1—
आपके घर का मुख्य द्वार उतर-पूर्व में होना चाहिए ,कई लोगो का मानना है के मेन गेट इन चार दिशाओं  ईशान, उत्तर, वायव्य और पश्चिम में हो तो भी ठीक है ,जो सही नहीं है उतर -पूर्व का चुनाव इस लिए किया जाता है, सूरज पूर्व से होता है आगा आपके घर में उसकी किरणे सीधी पड़ती है तो इस से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है ,हालाँकि आप इस से सहमत नहीं हो लेकिन ये सत्य है सूरज की पहली किरणे आपके घर या किसी कमरे में नहीं पड़नी चाहिए .
उतर से आने वाली हवाएं और मैग्नेटिक किरणे आपके घर में पॉसिट्वे एनर्जी लाती है.

नियम नंबर 2—
बच्चों की पढ़ाई का कमरा पूर्व -उत्तर कोण में बनाना चाहिए ,पड़ते समय आपकी पीठ दक्षिण पश्चिम दिवार की तरफ हो और मुँह उतर दिशा की त्रफहाना चाहिए ,आपकी पीठ के पीछे खिड़की या दरवाजा न हो. कमरे का ईशान कोण काली होना चाहिए .

नियम नंबर 3—
घर में आंगन जरूर होना चाहिए अगर जगह कम है तो एक छोटा लॉन जरूर बना लें और उसमे लुछ फूलों के गमले और हरी घास लगा लें .

नियम नंबर 4—
स्नानघर और शौचालय -: घर में या घर के आंगन में टॉयलेट और बाथरूम बनाते वक्त वास्तु का सबसे ज्यादा ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इसके बुरे प्रभाव के कारण घर का वातावरण बिगड़ सकता है। दोनों ही स्थानों को ज्योतिष में राहु और चंद्र का स्थान माना गया है। स्नानगृह में चंद्रमा का वास है तथा शौचालय में राहू का। शौचालय और बाथरूम एकसाथ नहीं होना चाहिए अर्थात चंद्र और राहू का एकसाथ होना चंद्रग्रहण है। यदि ऐसा है तो यह गृह कलह का कारण बन जाएगा। वास्तु ग्रंथ ‘विश्वकर्मा प्रकाश’ में इस बारे में विस्तार से बताया गया है।

vastu tips for money luck

शौचालय -: यह मकान के नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) कोण में अथवा नैऋत्य कोण व पश्चिम दिशा के मध्य में होना उत्तम है। इसके अलावा शौचालय के लिए वायव्य कोण तथा दक्षिण दिशा के मध्य का स्थान भी उपयुक्त बताया गया है। शौचालय में सीट इस प्रकार हो कि उस पर बैठते समय आपका मुख दक्षिण या उत्तर की ओर होना चाहिए। शौचालय की नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकने के लिए शौचालय में एक्जास्ट फेन चलाकर उपयोग करना चाहिए।

स्नानघर -: स्नानघर पूर्व दिशा में होना चाहिए। नहाते समय हमारा मुंह अगर पूर्व या उत्तर में है तो लाभदायक माना जाता है। पूर्व में रोशनदान होना चाहिए। बाथरूम में वॉश बेशिन को उत्तर या पूर्वी दीवार में लगाना चाहिए। दर्पण को उत्तर या पूर्वी दीवार में लगाना चाहिए। दर्पण दरवाजे के ठीक सामने नहीं हो।
विशेष -:
नल से पानी का टपकते रहना वास्तुशास्त्र में आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण माना गया है।
जिनके घर में जल की निकासी दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा में होती है उन्हें आर्थिक समस्याओं के साथ अन्य कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उत्तर एवं पूर्व दिशा में जल की निकासी को आर्थिक दृष्टि से शुभ माना गया है।
जल संग्रहण का स्थान ईशान कोण को बनाएं।

 नियम नंबर 5—
घर के बाहर एक अलग स्थान देवता के लिए रखा जाता है । बदलते दौर के साथ एकल परिवार का चलन बढ़ा है इसलिए पूजा का कमरा घर के भीतर ही बनाया जाने लगा है अतएव वास्तु अनुसार पूजाघर का स्थान सही जगह बनाया जाए तो सकारात्मक ऊर्जा अवश्य प्रवाहित होती है।

वास्तु के अनुसार भगवान के लिए उत्तर-पूर्व की दिशा श्रेष्ठ रहती है। इस दिशा में पूजाघर स्थापित करें। । पूजाघर के ऊपर या नीचे की मंजिल पर शौचालय या रसोईघर नहीं होना चाहिए, न ही इनसे सटा हुआ। सीढ़ियों के नीचे पूजा का कमरा बिलकुल नहीं बनवाना चाहिए। यह हमेशा ग्राउंड फ्लोर पर होना चाहिए, तहखाने में नहीं। पूजा का कमरा खुला और बड़ा बनवाना चाहिए।

 नियम नंबर 6—
बेडरूम हमारे निवास स्थान की सबसे महत्वपूर्ण जगह है। इसका सुकून और शांति भरा होना जरूरी है। कई बार शयन कक्ष में सभी तरह की सुविधाएं होने के बाद भी  चैन की नींद नहीं आती।  इसका कारण शयन कक्ष का गलत स्थान पर निर्माण होना है। मुख्य शयन कक्ष घर के दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) की ओर होना चाहिए। अगर घर में एक मकान की ऊपरी मंजिल है तो मास्टर ऊपरी मंजिल मंजिल के दक्षिण-पश्चिम कोने में होना चाहिए।

शयन कक्ष में सोते समय हमेशा सिर दीवार से सटाकर सोना चाहिए। पैर दक्षिण और पूर्व दिशा में करने नहीं सोना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर पैर करके सोने से स्वास्थ्य लाभ तथा आर्थिक लाभ की संभावना रहती है। पश्चिम दिशा की ओर पैर करके सोने से शरीर की थकान निकलती है, नींद अच्छी आती है।

  • बिस्तर के सामने आईना कतई न लगाएं।
  • शयन कक्ष के दरवाजे के सामने पलंग न लगाएं।
  • डबलबेड के गद्दे अच्छे से जुड़े हुए होने चाहिए।
  • शयन कक्ष के दरवाजे करकराहट की आवाजें नहीं करने चाहिए।
  • शयन कक्ष में धार्मिक चित्र नहीं लगाने चाहिए। पलंग का आकार यथासंभव चौकोर रखना चाहिए।
  • पलंग की स्थापना छत के बीम के नीचे नहीं होनी चाहिए।
  • लकड़ी से बना पलंग श्रेष्ठ रहता है। लोहे से बने पलंग वर्जित कहे गए हैं।
  • शयन कक्ष में कमरे के प्रवेश द्वार के सामने वाली दीवार के बाएं कोने पर धातु की कोई चीज लटकाकर रखें।
  • वास्तुशास्त्र के अनुसार यह स्थान भाग्य और संपत्ति का क्षेत्र होता है।
  • इस दिशा में दीवार में दरारें हों तो उसकी मरम्मत करवा दें। इस दिशा का कटा होना भी आर्थिक नुकसान का कारण होता है।

नियम नंबर 7—
पूर्व दिशा –: पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है। इस दिशा से सकारात्मक व ऊर्जावान किरणें हमारे घर में प्रवेश करती हैं। यदि घर का द्वार इस दिशा में है तो मात्र उत्तम। खिड़की रख सकते हैं।

पश्चिम दिशा –: आपका रसोईघर या टॉयलेट इस दिशा में होना चाहिए। रसोईघर और टॉयलेट पास- पास न हो, इसका भी ध्यान रखें

उत्तर दिशा –: इस दिशा में घर के सबसे ज्यादा खिड़की और दरवाजे होना चाहिए घर की बालकनी व वॉश बेसिन भी इसी दिशा में होना चाहिए। यदि घर का द्वार इस दिशा में है और अति उत्तम।

दक्षिण दिशा –: दक्षिण दिशा में किसी भी प्रकार का खुलापन, शौचालय आदि नहीं होना चाहिए। घर में इस स्थान पर भारी सामान रखें। यदि इस दिशा में द्वार या खिड़की है तो घर में नकारात्मक ऊर्जा रहेगी और ऑक्सीजन का लेवल भी कम हो जाएग। इससे गृह कलह बढ़ेगी।

उत्तर-पश्चिम दिशा –: इसे वायव्य दिशा भी कहते हैं। इस दिशा में आपका बेडरूम, गैरेज, गौशाला आदि होना चाहिए।

उत्तर-पूर्व दिशा –: इसे ईशान दिशा भी कहते हैं यह दिशा जल का स्थान है इस दिशा में बोरिंग, स्वीमिंग पूल, पूजास्थल आदि होना चाहिए। यदि इस दिशा में घर का द्वार है तो सोने पर सुहागा

दक्षिण-पश्चिम दिशा –: इस दिशा को नैऋत्य दिशा कहते हैं। इस दिशा में खुलापन अर्थात खिड़की, दरवाजे बिलकुल ही नहीं होना चाहिए घर के मुखिया का कमरा यहां बना सकते हैं कैश काउंटर, मशीनें आदि आप इस दिशा में रख सकते हैं

दक्षिण-पूर्व दिशा — : इसे घर का आग्नेय कोण कहते हैं यह ‍अग्नि तत्व की दिशा है इस दिशा में गैस, बॉयलर, ट्रांसफॉर्मर आदि होना चाहिए
नियम नंबर 8—

  1. घर के सामने आंगन और पीछे भी आंगन हो जिसके बीच में तुलसी का एक पौधा लगा हो।
  2.  घर के सामने या निकट तिराहा-चौराहा नहीं होना चाहिए।
  3.  घर का दरवाजा दो पल्लों का होना चाहिए अर्थात बीच में से भीतर खुलने वाला हो। दरवाजे की दीवार के दाएं ‘शुभ’ और बाएं ‘लाभ’ लिखा हो।
  4.  घर के प्रवेश द्वार के ऊपर स्वस्तिक अथवा ‘ॐ’ की आकृति लगाएं।
  5. घर के अंदर आग्नेय कोण में किचन, ईशान में प्रार्थना-ध्यान का कक्ष हो। नैऋत्य कोण में शौचालय, दक्षिण में भारी सामान रखने का स्थान आदि हो।
  6. घर में बहुत सारे देवी-देवताओं के चित्र या मूर्ति न रखें। घर में मंदिर न बनाएं।
  7.  घर के सारे कोने और ब्रह्म स्थान (बीच का स्थान) खाली रखें।
  8. घर हो मंदिर के आसपास तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  9.  घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक वस्तुओं का संग्रह न करें और अटाला भी इकट्ठा न करें।
  10. घर में सीढ़ियां विषम संख्या (5, 7, 9.11.13) में होनी चाहिए।
  11. उत्तर, पूर्व तथा उत्तर-पूर्व (ईशान) में खुला स्थान अधिक रखना चाहिए।
  12. घर में किसी भी तरह के नकारात्मक पौधे या वृक्ष रोपित न करें।
  13. घर में टूटे-फूटे बर्तन एवं कबाड़ को जमा करके रखने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बहुत से लोग घर
  14. की छत पर अथवा सीढ़ी के नीचे कबाड़ जमा करके रखते हैं, जो धन वृद्धि में बाधक होता है।

नियम नंबर 9—
अतिथि देवता के समान होता है तो उसका कक्ष उत्तर-पूर्व या उत्तर-पश्चिम दिशा में ही होना चाहिए। यह मेहमान के लिए शुभ होता है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में अतिथि कक्ष (गेस्ट रूम) होना उत्तम माना गया है। दक्षि‍ण-पश्चि‍म दि‍शा में नहीं बनाना चाहि‍ए क्‍योंकि‍ यह दि‍शा केवल घर के स्‍वामी के लि‍ए होती है। उत्तर-पश्चि‍म दि‍शा आपके मेहमानों के ठहरने के लि‍ए सबसे सुवि‍धाजनक दि‍शा है। आप आग्‍नेय कोण अर्थात दक्षि‍ण-पूर्वी दि‍शा में भी गेस्‍टरूम बना सकते हैं।
नियम नंबर 10—
भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने और उत्तम भोजन निर्माण के लिए रसोईघर का स्थान घर में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। यदि हम भोजन अच्छा करते हैं तो हमारा दिन भी अच्छा गुजरता है। यदि रसोई कक्ष का निर्माण सही दिशा में नहीं किया गया है तो परिवार के सदस्यों को भोजन से पाचन संबंधी अनेक बीमारियां हो सकती हैं। रसोईघर के लिए सबसे उपयुक्त स्थान आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्वी दिशा है, जो कि अग्नि का स्थान होता है। दक्षिण-पूर्व दिशा के बाद दूसरी वरीयता का उपयुक्त स्थान उत्तर-पश्चिम दिशा है.

conclusion :- 
मित्रो इन न्यायमो का पालन कर क्ले आपके घर में सदैव शांति और खुशहाली बानी रहेगी ,इन छोटी छोटी बातों के अपने जीवन में उतरे ताकि आपके जीवन में आने वाले संतों से आप बच सके .अगर आपको ये लेख पसंद ए तो कृपा व्हाट्सप्प पर अपने मित्रों के साथ चर्चा जरूर करें 

 8 total views,  5 views today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *